Tuesday, September 4, 2007

मायावी चैनलों से चौबीस घंटेटपकता रहे लहू फिर भी दर्शकों में प्रतिक्रिया नहीं होतीलहू और चीख के दृश्यों ने दर्शकों कीसंवेदनाओं को नष्ट कर दिया हैइसीलिए जब कोई वृद्ध अपने शरीर में लगाता है आगचैनल के सीधे प्रसारण को देखते हुए दर्शकसिहरते नहीं हैं न ही बंद करते हैं अपनी आँखेंमुठभेड़ का सीधा प्रसारण देखते हुए बच्चेमुस्कराते हुए खाते हैं पापकार्नमायावी चैनलों से चौबीस घंटेझाँकते रहते हैं लोकतंत्र के ज़ख़्मबलात्कार की शिकार युवती का नए सिरे सेकैमरा करता है बलात्कारपरिजनों को गँवा देने वाले अभागे लोगों कोनए सिरे से तड़पाता है कैमराऔर भावहीन उद्धोषिकाएँ सारा ध्यान देती हैंशब्दों की जगह कामुक अदाओं परमायावी चैनलों से चौबीस घंटेबरसती रहती है प्रायोजित क़िस्म की समृद्धिसमृद्धि की दीवार के पीछेआत्महत्या कर रहे किसानों का वर्णन नहीं होताकुपोषण के शिकार बच्चों की कोई ख़बर नहीं होतीभूख से तंग आकर जान देने वाले पूरे परिवार काविवरण नहीं होताभोजन में मिलाए जा रहे ज़हर की साज़िश कापर्दाफ़ाश नहीं होतामायावी चैनलों से चौबीस घंटेप्रसारित होते रहते हैं झूठ महज गढ़े हुए

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